Sunday, April 6, 2025
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सूरत में युवती से बलात्कार मामले में जैन मुनि शांतिसागर को 10 साल जेल की सजा; तांत्रिक अनुष्ठान के नाम पर उपाश्रय की थी हैवानियत

सूरत। नानपुरा, टिमलियावाड़ में जैन उपाश्रय में वडोदरा की युवती से दुष्कर्म मामले में जैन मुनि शांतिसागर को अदालत ने 4 अप्रैल को दोषी करार दिया था। आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने जैन मुनि शांति सागर को 10 साल कैद की सजा सुनाई है। शिकायत दर्ज होने के बाद से जैन मुनि पिछले आठ वर्षों से जेल में हैं। उन्हें जमानत भी नहीं दी गई।
बता दें, आज से आठ साल पहले सूरत के नानपुरा टिमलियावाड में स्थित दिगंबर जैन उपाश्रय में धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर मध्य प्रदेश की मूल निवासी और वडोदरा में रहने वाली 19 वर्षीय श्राविका युवती के साथ बलात्कार करने के मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी दिगंबर जैन मुनि शांति सागरजी महाराज को आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एके शाह ने आईपीसी-376(1) और 376(2)(एफ) के तहत दोषी करार देते हुए 10 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा पीड़िता को आर्थिक मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है।
मूल रूप से मध्यप्रदेश निवासी और वडोदरा में रहने वाली 19 वर्षीय पीड़िता श्राविका युवती ने 1 अक्टूबर 2017 को नानपुरा टिमलियावाड में स्थित महावीर दिगंबर जैन उपाश्रय में रहने वाले मूल रूप से गुना, मध्यप्रदेश निवासी 49 वर्षीय आरोपी शांति सागरजी महाराज उर्फ ​​(गिरिराज) सजनालाल शर्मा के खिलाफ आईपीसी-376(1), 376(2)(एफ) के तहत अठवा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता श्राविका और उसके परिवार ने आरोपी शांति सागरजी को अपना गुरु माना था। आरोपी शांतिसागर महाराज ने इसका फायदा उठाते हुए श्राविका, उसके माता-पिता और भाई को रात्रि में दर्शन के लिए बुलाया। उसने युवती के माता-पिता को अनुष्ठान करने के बहाने एक अलग कमरे में बिठाया और उनसे मंत्रोच्चार करने को कहा, और कहा कि कुछ भी हो जाए, जब तक मैं न कहूं, आप इस मंत्र का जाप करते रहेंगे। इस बीच जैन मुनि ने श्राविका को दूसरे कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया।
युवती की शिकायत के बाद अठवा पुलिस ने दिगंबर जैन मुनि शांतिसागर महाराज को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने अदालत में 51 गवाहों और 62 दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ आरोप पत्र पेश किया था। आठ साल से जेल में बंद आरोपी जैन मुनि के खिलाफ मामले की अंतिम सुनवाई के बाद शुक्रवार देर शाम अदालत ने आरोपी शांतिसागरजी महाराज को ईपीसीओ-376(1) और 376(2)(एफ) के अपराधों में दोषी पाया और शनिवार, 5 अप्रैल को 10 साल की सजा सुनाई।

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