अहमदाबाद। प्रदेश की 107 नगर पालिकाओं का खजाना खाली हो गया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि चीफ ऑफिसर से लेकर दैनिक और स्थायी कर्मचारियों को तीन महीने से तनख्वाह नहीं मिली है। नगर पालिकाओं ने वित्तीय व्यवहार्यता खो दी है। नतीजतन स्वनिधि में वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। यह स्थिति तब बनती है जब अनुदान की रकम अटक जाती है।
नगर पालिकाओं की खस्ता हालत के कारण चीफ ऑफिसर समेत 10 हजार से अधिक दैनिक-स्थायी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से परेशानी हो गई है। गुजरात में कुल 157 नगर पालिकाएं हैं, जिनमें से 107 नगर पालिकाओं के पास चीफ ऑफिसर से लेकर दैनिक-स्थायी कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। भाजपा पदाधिकारी जीवंत गुजरात, समृद्ध गुजरात का दावा करते हैं तो वहीं दूसरी ओर नगर पालिका की व्यवस्था गर्त में चली गई है।
नगर पालिकाओं की इस स्थिति के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के कारण कर नहीं लगाया जाता है। लोगों का आक्रोश न झेलना पड़े, इसलिए नियमित रूप से कर नहीं वसूला जाता है। इसलिए अधिकांश नगर पालिकाओं की वित्तीय स्थिति खराब हो गई है। कुछ नगर पालिकाओं के पास बिजली का बिल तक भरने तक का पैसा नहीं है। इन सबके बीच राज्य सरकार ऑक्ट्राय की ग्रांट रोक दी है। नगर पालिकाओं के पास आय का दूसरा कोई स्रोत नहीं है।