गांधीनगर। प्रदेश की राजधानी गांधीनगर से बड़ी खबर आ रही है। राज्यमंत्री भीखूसिंह परमार की तबीयत खराब हो गई। अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने के बाद उन्हें यूएन मेहता अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है।
भीखू सिंह परमार का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। विधायक बनने के लिए 27 साल तक संघर्ष करना पड़ा। 1995 में उन्होंने पहली बार मोडासा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद 2002 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय और 2007 में बीएसपी के टिकट पर मोडासा सीट से चुनाव लड़े, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और हार गए।
इसके बाद भाजपा ने 2017 के चुनाव में भीखू सिंह परमार को मोडासा सीट से टिकट दिया, लेकिन 1640 वोटों के अंतर से हार गए। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने फिर से भीखू सिंह को मोडासा सीट से टिकट दिया। इस बार वह चुनाव जीतकर अपने 27 साल के राजनीतिक सफर में पहली बार विधायक बने। भीखूसिंह परमार गुजरात सरकार के मंत्रिमंडल में राज्य स्तरीय मंत्री हैं और खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भीखूसिंह परमार ने जितना संघर्ष राजनीति में किया है उतना ही संघर्ष जीवन में भी किया है। गुजरात परिवहन निगम में सहायक के रूप में काम किया। जिसमें उन्होंने सफाई का काम भी किया। तीन साल तक काम करने के बाद उन्होंने हेल्पर की नौकरी छोड़ दी। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में अस्थायी तौर पर दवा छिड़काव का काम किया था।